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(src)="s1.1"> अल ् लाह के नाम से जो बड ़ ा कृपालु और अत ् यन ् त दयावान हैं ।
(trg)="s1.1"> Dengan menyebut nama Allah Yang Maha Pemurah lagi Maha Penyayang .
(src)="s1.2"> प ् रशंसा अल ् लाह ही के लिए हैं जो सारे संसार का रब हैं
(trg)="s1.2"> Segala puji bagi Allah , Tuhan semesta alam .
(src)="s1.3"> बड ़ ा कृपालु , अत ् यन ् त दयावान हैं
(trg)="s1.3"> Maha Pemurah lagi Maha Penyayang .
(src)="s1.4"> बदला दिए जाने के दिन का मालिक हैं
(trg)="s1.4"> Yang menguasai di Hari Pembalasan .
(src)="s1.5"> हम तेरी बन ् दगी करते हैं और तुझी से मदद माँगते हैं
(trg)="s1.5"> Hanya Engkaulah yang kami sembah , dan hanya kepada Engkaulah kami meminta pertolongan .
(src)="s1.6"> हमें सीधे मार ् ग पर चला
(trg)="s1.6"> Tunjukilah kami jalan yang lurus ,
(src)="s1.7"> उन लोगों के मार ् ग पर जो तेरे कृपापात ् र हुए , जो न प ् रकोप के भागी हुए और न पथभ ् रष ् ट
(trg)="s1.7"> ( yaitu ) Jalan orang-orang yang telah Engkau beri nikmat kepada mereka ; bukan ( jalan ) mereka yang dimurkai dan bukan ( pula jalan ) mereka yang sesat .
(src)="s2.1"> अलीफ ़ ॰ लाम ॰ मीम ॰
(trg)="s2.1"> Alif laam miim .
(src)="s2.2"> वह किताब यही हैं , जिसमें कोई सन ् देह नहीं , मार ् गदर ् शन हैं डर रखनेवालों के लिए ,
(trg)="s2.2"> Kitab ( Al Quran ) ini tidak ada keraguan padanya ; petunjuk bagi mereka yang bertakwa ,
(src)="s2.3"> जो अनदेखे ईमान लाते हैं , नमाज ़ क ़ ायम करते हैं और जो कुछ हमने उन ् हें दिया हैं उसमें से कुछ खर ् च करते हैं ;
(trg)="s2.3"> ( yaitu ) mereka yang beriman kepada yang ghaib , yang mendirikan shalat , dan menafkahkan sebahagian rezeki yang Kami anugerahkan kepada mereka .
(src)="s2.4"> और जो उस पर ईमान लाते हैं जो तुम पर उतरा और जो तुमसे पहले अवतरित हुआ हैं और आख ़ िरत पर वही लोग विश ् वास रखते हैं ;
(trg)="s2.4"> dan mereka yang beriman kepada Kitab ( Al Quran ) yang telah diturunkan kepadamu dan Kitab-kitab yang telah diturunkan sebelummu , serta mereka yakin akan adanya ( kehidupan ) akhirat .
(src)="s2.5"> वही लोग हैं जो अपने रब के सीधे मार ् ग पर हैं और वही सफलता प ् राप ् त करनेवाले हैं
(trg)="s2.5"> Mereka itulah yang tetap mendapat petunjuk dari Tuhan mereka , dan merekalah orang-orang yang beruntung .
(src)="s2.6"> जिन लोगों ने कुफ ़ ् र ( इनकार ) किया उनके लिए बराबर हैं , चाहे तुमने उन ् हें सचेत किया हो या सचेत न किया हो , वे ईमान नहीं लाएँगे
(trg)="s2.6"> Sesungguhnya orang-orang kafir , sama saja bagi mereka , kamu beri peringatan atau tidak kamu beri peringatan , mereka tidak juga akan beriman .
(src)="s2.7"> अल ् लाह ने उनके दिलों पर और कानों पर मुहर लगा दी है और उनकी आँखों पर परदा पड ़ ा है , और उनके लिए बड ़ ी यातना है
(trg)="s2.7.0"> Allah telah mengunci-mati hati dan pendengaran mereka , dan penglihatan mereka ditutup .
(trg)="s2.7.1"> Dan bagi mereka siksa yang amat berat .
(src)="s2.8"> कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि हम अल ् लाह और अन ् तिम दिन पर ईमान रखते हैं , हालाँकि वे ईमान नहीं रखते
(trg)="s2.8"> Di antara manusia ada yang mengatakan : " Kami beriman kepada Allah dan Hari kemudian , " pada hal mereka itu sesungguhnya bukan orang-orang yang beriman .
(src)="s2.9"> वे अल ् लाह और ईमानवालों के साथ धोखेबाज ़ ी कर रहे हैं , हालाँकि धोखा वे स ् वयं अपने-आपको ही दे रहे हैं , परन ् तु वे इसको महसूस नहीं करते
(trg)="s2.9"> Mereka hendak menipu Allah dan orang-orang yang beriman , padahal mereka hanya menipu dirinya sendiri sedang mereka tidak sadar .
(src)="s2.10"> उनके दिलों में रोग था तो अल ् लाह ने उनके रोग को और बढ ़ ा दिया और उनके लिए झूठ बोलते रहने के कारण उनके लिए एक दुखद यातना है
(trg)="s2.10"> Dalam hati mereka ada penyakit , lalu ditambah Allah penyakitnya ; dan bagi mereka siksa yang pedih , disebabkan mereka berdusta .
(src)="s2.11"> और जब उनसे कहा जाता है कि " ज ़ मीन में बिगाड ़ पैदा न करो " , तो कहते हैं , " हम तो केवल सुधारक है । " "
(trg)="s2.11.0"> Dan bila dikatakan kepada mereka : " Janganlah kamu membuat kerusakan di muka bumi " .
(trg)="s2.11.1"> Mereka menjawab : " Sesungguhnya kami orang-orang yang mengadakan perbaikan " .
(src)="s2.12"> जान लो ! वही हैं जो बिगाड ़ पैदा करते हैं , परन ् तु उन ् हें एहसास नहीं होता
(trg)="s2.12"> Ingatlah , sesungguhnya mereka itulah orang-orang yang membuat kerusakan , tetapi mereka tidak sadar .
(src)="s2.13"> और जब उनसे कहा जाता है , " ईमान लाओ जैसे लोग ईमान लाए हैं " , कहते हैं , " क ् या हम ईमान लाए जैसे कम समझ लोग ईमान लाए हैं ? " जान लो , वही कम समझ हैं परन ् तु जानते नहीं
(trg)="s2.13.0"> Apabila dikatakan kepada mereka : " Berimanlah kamu sebagaimana orang-orang lain telah beriman " .
(trg)="s2.13.1"> Mereka menjawab : " Akan berimankah kami sebagaimana orang-orang yang bodoh itu telah beriman ? "
(src)="s2.14"> और जब ईमान लानेवालों से मिलते हैं तो कहते , " हम भी ईमान लाए हैं , " और जब एकान ् त में अपने शैतानों के पास पहुँचते हैं , तो कहते हैं , " हम तो तुम ् हारे साथ हैं और यह तो हम केवल परिहास कर रहे हैं । "
(trg)="s2.14.0"> Dan bila mereka berjumpa dengan orang-orang yang beriman , mereka mengatakan : " Kami telah beriman " .
(trg)="s2.14.1"> Dan bila mereka kembali kepada syaitan-syaitan mereka , mereka mengatakan : " Sesungguhnya kami sependirian dengan kamu , kami hanyalah berolok-olok " .
(src)="s2.15"> अल ् लाह उनके साथ परिहास कर रहा है और उन ् हें उनकी सरकशी में ढील दिए जाता है , वे भटकते फिर रहे हैं
(trg)="s2.15"> Allah akan ( membalas ) olok-olokan mereka dan membiarkan mereka terombang-ambing dalam kesesatan mereka .
(src)="s2.16"> यही वे लोग हैं , जिन ् होंने मार ् गदर ् शन के बदले में गुमराही मोल ली , किन ् तु उनके इस व ् यापार में न कोई लाभ पहुँचाया , और न ही वे सीधा मार ् ग पा सके
(trg)="s2.16"> Mereka itulah orang yang membeli kesesatan dengan petunjuk , maka tidaklah beruntung perniagaan mereka dan tidaklah mereka mendapat petunjuk .
(src)="s2.17"> उनकी मिसाल ऐसी हैं जैसे किसी व ् यक ् ति ने आग जलाई , फिर जब उसने उसके वातावरण को प ् रकाशित कर दिया , तो अल ् लाह ने उसका प ् रकाश ही छीन लिया और उन ् हें अँधेरों में छोड ़ दिया जिससे उन ् हें कुछ सुझाई नहीं दे रहा हैं
(trg)="s2.17"> Perumpamaan mereka adalah seperti orang yang menyalakan api , maka setelah api itu menerangi sekelilingnya Allah hilangkan cahaya ( yang menyinari ) mereka , dan membiarkan mereka dalam kegelapan , tidak dapat melihat .
(src)="s2.18"> वे बहरे हैं , गूँगें हैं , अन ् धे हैं , अब वे लौटने के नहीं
(trg)="s2.18"> Mereka tuli , bisu dan buta , maka tidaklah mereka akan kembali ( ke jalan yang benar ) ,
(src)="s2.19"> या ( उनकी मिसाल ऐसी है ) जैसे आकाश से वर ् षा हो रही हो जिसके साथ अँधेरे हों और गरज और चमक भी हो , वे बिजली की कड ़ क के कारण मृत ् यु के भय से अपने कानों में उँगलियाँ दे ले रहे हों - और अल ् लाह ने तो इनकार करनेवालों को घेर रखा हैं
(trg)="s2.19.0"> atau seperti ( orang-orang yang ditimpa ) hujan lebat dari langit disertai gelap gulita , guruh dan kilat ; mereka menyumbat telinganya dengan anak jarinya , karena ( mendengar suara ) petir , sebab takut akan mati .
(trg)="s2.19.1"> Dan Allah meliputi orang-orang yang kafir .
(src)="s2.20"> मानो शीघ ् र ही बिजली उनकी आँखों की रौशनी उचक लेने को है ; जब भी उनपर चमकती हो , वे चल पड ़ ते हो और जब उनपर अँधेरा छा जाता हैं तो खड ़ े हो जाते हो ; अगर अल ् लाह चाहता तो उनकी सुनने और देखने की शक ् ति बिलकुल ही छीन लेता । निस ् सन ् देह अल ् लाह को हर चीज ़ की सामर ् थ ् य प ् राप ् त है
(trg)="s2.20.1"> Setiap kali kilat itu menyinari mereka , mereka berjalan di bawah sinar itu , dan bila gelap menimpa mereka , mereka berhenti .
(trg)="s2.20.2"> Jikalau Allah menghendaki , niscaya Dia melenyapkan pendengaran dan penglihatan mereka .
(src)="s2.21"> ऐ लोगो ! बन ् दगी करो अपने रब की जिसने तुम ् हें और तुमसे पहले के लोगों को पैदा किया , ताकि तुम बच सको ;
(trg)="s2.21"> Hai manusia , sembahlah Tuhanmu yang telah menciptakanmu dan orang-orang yang sebelummu , agar kamu bertakwa ,
(src)="s2.22"> वही है जिसने तुम ् हारे लिए ज ़ मीन को फर ् श और आकाश को छत बनाया , और आकाश से पानी उतारा , फिर उसके द ् वारा हर प ् रकार की पैदावार की और फल तुम ् हारी रोजी के लिए पैदा किए , अतः जब तुम जानते हो तो अल ् लाह के समकक ् ष न ठहराओ
(trg)="s2.22"> Dialah yang menjadikan bumi sebagai hamparan bagimu dan langit sebagai atap , dan Dia menurunkan air ( hujan ) dari langit , lalu Dia menghasilkan dengan hujan itu segala buah-buahan sebagai rezeki untukmu ; karena itu janganlah kamu mengadakan sekutu-sekutu bagi Allah , padahal kamu mengetahui .
(src)="s2.23"> और अगर उसके विषय में जो हमने अपने बन ् दे पर उतारा हैं , तुम किसी सन ् देह में न हो तो उस जैसी कोई सूरा ले आओ और अल ् लाह से हटकर अपने सहायकों को बुला लो जिनके आ मौजूद होने पर तुम ् हें विश ् वास हैं , यदि तुम सच ् चे हो
(trg)="s2.23"> Dan jika kamu ( tetap ) dalam keraguan tentang Al Quran yang Kami wahyukan kepada hamba Kami ( Muhammad ) , buatlah satu surat ( saja ) yang semisal Al Quran itu dan ajaklah penolong-penolongmu selain Allah , jika kamu orang-orang yang benar .
(src)="s2.24"> फिर अगर तुम ऐसा न कर सको और तुम कदापि नहीं कर सकते , तो डरो उस आग से जिसका ईधन इनसान और पत ् थर हैं , जो इनकार करनेवालों के लिए तैयार की गई है
(trg)="s2.24"> Maka jika kamu tidak dapat membuat ( nya ) -- dan pasti kamu tidak akan dapat membuat ( nya ) , peliharalah dirimu dari neraka yang bahan bakarnya manusia dan batu , yang disediakan bagi orang-orang kafir .
(src)="s2.25"> जो लोग ईमान लाए और उन ् होंने अच ् छे कर ् म किए उन ् हें शुभ सूचना दे दो कि उनके लिए ऐसे बाग ़ है जिनके नीचे नहरें बह रहीं होगी ; जब भी उनमें से कोई फल उन ् हें रोजी के रूप में मिलेगा , तो कहेंगे , " यह तो वही हैं जो पहले हमें मिला था , " और उन ् हें मिलता-जुलता ही ( फल ) मिलेगा ; उनके लिए वहाँ पाक-साफ ़ पत ् नि याँ होगी , और वे वहाँ सदैव रहेंगे
(trg)="s2.25.0"> Dan sampaikanlah berita gembira kepada mereka yang beriman dan berbuat baik , bahwa bagi mereka disediakan surga-surga yang mengalir sungai-sungai di dalamnya .
(trg)="s2.25.1"> Setiap mereka diberi rezeki buah-buahan dalam surga-surga itu , mereka mengatakan : " Inilah yang pernah diberikan kepada kami dahulu " .
(src)="s2.26"> निस ् संदेह अल ् लाह नहीं शरमाता कि वह कोई मिसाल पेश करे चाहे वह हो मच ् छर की , बल ् कि उससे भी बढ ़ कर किसी तुच ् छ चीज ़ की । फिर जो ईमान लाए है वे तो जानते है कि वह उनके रब की ओर से सत ् य हैं ; रहे इनकार करनेवाले तो वे कहते है , " इस मिसाल से अल ् लाह का अभिप ् राय क ् या है ? " इससे वह बहुतों को भटकने देता है और बहुतों को सीधा मार ् ग दिखा देता है , मगर इससे वह केवल अवज ् ञाकारियों ही को भटकने देता है
(trg)="s2.26.1"> Adapun orang-orang yang beriman , maka mereka yakin bahwa perumpamaan itu benar dari Tuhan mereka , tetapi mereka yang kafir mengatakan : " Apakah maksud Allah menjadikan ini untuk perumpamaan ? " .
(trg)="s2.26.2"> Dengan perumpamaan itu banyak orang yang disesatkan Allah , dan dengan perumpamaan itu ( pula ) banyak orang yang diberi-Nya petunjuk .
(src)="s2.27"> जो अल ् लाह की प ् रतिज ् ञा को उसे सुदृढ ़ करने के पश ् चात भंग कर देते हैं और जिसे अल ् लाह ने जोड ़ ने का आदेश दिया है उसे काट डालते हैं , और ज ़ मीन में बिगाड ़ पैदा करते हैं , वही हैं जो घाटे में हैं
(trg)="s2.27.0"> ( yaitu ) orang-orang yang melanggar perjanjian Allah sesudah perjanjian itu teguh , dan memutuskan apa yang diperintahkan Allah ( kepada mereka ) untuk menghubungkannya dan membuat kerusakan di muka bumi .
(trg)="s2.27.1"> Mereka itulah orang-orang yang rugi .
(src)="s2.28"> तुम अल ् लाह के साथ अविश ् वास की नीति कैसे अपनाते हो , जबकि तुम निर ् जीव थे तो उसने तुम ् हें जीवित किया , फिर वही तुम ् हें मौत देता हैं , फिर वही तुम ् हें जीवित करेगा , फिर उसी की ओर तुम ् हें लौटना हैं ?
(trg)="s2.28"> Mengapa kamu kafir kepada Allah , padahal kamu tadinya mati , lalu Allah menghidupkan kamu , kemudian kamu dimatikan dan dihidupkan-Nya kembali , kemudian kepada-Nya-lah kamu dikembalikan ?
(src)="s2.29"> वही तो है जिसने तुम ् हारे लिए ज ़ मीन की सारी चीज ़ े पैदा की , फिर आकाश की ओर रुख ़ किया और ठीक तौर पर सात आकाश बनाए और वह हर चीज ़ को जानता है
(trg)="s2.29.0"> Dialah Allah , yang menjadikan segala yang ada di bumi untuk kamu dan Dia berkehendak ( menciptakan ) langit , lalu dijadikan-Nya tujuh langit .
(trg)="s2.29.1"> Dan Dia Maha Mengetahui segala sesuatu .
(src)="s2.30"> और याद करो जब तुम ् हारे रब ने फरिश ् तों से कहा कि " मैं धरती में ( मनुष ् य को ) खलीफ ़ ा ( सत ् ताधारी ) बनानेवाला हूँ । " उन ् होंने कहा , " क ् या उसमें उसको रखेगा , जो उसमें बिगाड ़ पैदा करे और रक ् तपात करे और हम तेरा गुणगान करते और तुझे पवित ् र कहते हैं ? " उसने कहा , " मैं जानता हूँ जो तुम नहीं जानते । "
(trg)="s2.30.0"> Ingatlah ketika Tuhanmu berfirman kepada para Malaikat : " Sesungguhnya Aku hendak menjadikan seorang khalifah di muka bumi " .
(trg)="s2.30.1"> Mereka berkata : " Mengapa Engkau hendak menjadikan ( khalifah ) di bumi itu orang yang akan membuat kerusakan padanya dan menumpahkan darah , padahal kami senantiasa bertasbih dengan memuji Engkau dan mensucikan Engkau ? "
(src)="s2.31"> उसने ( अल ् लाह ने ) आदम को सारे नाम सिखाए , फिर उन ् हें फ ़ रिश ् तों के सामने पेश किया और कहा , " अगर तुम सच ् चे हो तो मुझे इनके नाम बताओ । "
(trg)="s2.31"> Dan Dia mengajarkan kepada Adam nama-nama ( benda-benda ) seluruhnya , kemudian mengemukakannya kepada para Malaikat lalu berfirman : " Sebutkanlah kepada-Ku nama benda-benda itu jika kamu mamang benar orang-orang yang benar ! "
(src)="s2.32"> वे बोले , " पाक और महिमावान है तू ! तूने जो कुछ हमें बताया उसके सिवा हमें कोई ज ् ञान नहीं । निस ् संदेह तू सर ् वज ् ञ , तत ् वदर ् शी है । "
(trg)="s2.32"> Mereka menjawab : " Maha Suci Engkau , tidak ada yang kami ketahui selain dari apa yang telah Engkau ajarkan kepada kami ; sesungguhnya Engkaulah Yang Maha Mengetahui lagi Maha Bijaksana " .
(src)="s2.33"> उसने कहा , " ऐ आदम ! उन ् हें उन लोगों के नाम बताओ । " फिर जब उसने उन ् हें उनके नाम बता दिए तो ( अल ् लाह ने ) कहा , " क ् या मैंने तुमसे कहा न था कि मैं आकाशों और धरती की छिपी बातों को जानता हूँ और मैं जानता हूँ जो कुछ तुम ज ़ ाहिर करते हो और जो कुछ छिपाते हो । "
(trg)="s2.33.0"> Allah berfirman : " Hai Adam , beritahukanlah kepada mereka nama-nama benda ini " .
(trg)="s2.33.1"> Maka setelah diberitahukannya kepada mereka nama-nama benda itu , Allah berfirman : " Bukankah sudah Ku-katakan kepadamu , bahwa sesungguhnya Aku mengetahui rahasia langit dan bumi dan mengetahui apa yang kamu lahirkan dan apa yang kamu sembunyikan ? "
(src)="s2.34"> और याद करो जब हमने फ ़ रिश ् तों से कहा कि " आदम को सजदा करो " तो , उन ् होंने सजदा किया सिवाय इबलील के ; उसने इनकार कर दिया और लगा बड ़ ा बनने और काफ ़ िर हो रहा
(trg)="s2.34"> Dan ( ingatlah ) ketika Kami berfirman kepada para malaikat : " Sujudlah kamu kepada Adam , " maka sujudlah mereka kecuali Iblis ; ia enggan dan takabur dan adalah ia termasuk golongan orang-orang yang kafir .
(src)="s2.35"> और हमने कहा , " ऐ आदम ! तुम और तुम ् हारी पत ् नी जन ् नत में रहो और वहाँ जी भर बेरोक-टोक जहाँ से तुम दोनों का जी चाहे खाओ , लेकिन इस वृक ् ष के पास न जाना , अन ् यथा तुम ज ़ ालिम ठहरोगे । "
(trg)="s2.35"> Dan Kami berfirman : " Hai Adam , diamilah oleh kamu dan isterimu surga ini , dan makanlah makanan-makanannya yang banyak lagi baik dimana saja yang kamu sukai , dan janganlah kamu dekati pohon ini , yang menyebabkan kamu termasuk orang-orang yang zalim .
(src)="s2.36"> अन ् ततः शैतान ने उन ् हें वहाँ से फिसला दिया , फिर उन दोनों को वहाँ से निकलवाकर छोड ़ ा , जहाँ वे थे । हमने कहा कि " उतरो , तुम एक-दूसरे के शत ् रु होगे और तुम ् हें एक समय तक धरती में ठहरना और बिसलना है । "
(trg)="s2.36"> Lalu keduanya digelincirkan oleh syaitan dari surga itu dan dikeluarkan dari keadaan semula dan Kami berfirman : " Turunlah kamu ! sebagian kamu menjadi musuh bagi yang lain , dan bagi kamu ada tempat kediaman di bumi , dan kesenangan hidup sampai waktu yang ditentukan " .
(src)="s2.37"> फिर आदम ने अपने रब से कुछ शब ् द पा लिए , तो अल ् लाह ने उसकी तौबा क ़ बूल कर ली ; निस ् संदेह वही तौबा क ़ बूल करने वाला , अत ् यन ् त दयावान है
(trg)="s2.37.0"> Kemudian Adam menerima beberapa kalimat dari Tuhannya , maka Allah menerima taubatnya .
(trg)="s2.37.1"> Sesungguhnya Allah Maha Penerima taubat lagi Maha Penyayang .
(src)="s2.38"> हमने कहा , " तुम सब यहाँ से उतरो , फिर यदि तुम ् हारे पास मेरी ओर से कोई मार ् गदर ् शन पहुँचे तो जिस किसी ने मेरे मार ् गदर ् शन का अनुसरण किया , तो ऐसे लोगों को न तो कोई भय होगा और न वे शोकाकुल होंगे । "
(trg)="s2.38.0"> Kami berfirman : " Turunlah kamu semuanya dari surga itu !
(trg)="s2.38.1"> Kemudian jika datang petunjuk-Ku kepadamu , maka barang siapa yang mengikuti petunjuk-Ku , niscaya tidak ada kekhawatiran atas mereka , dan tidak ( pula ) mereka bersedih hati " .
(src)="s2.39"> और जिन लोगों ने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया , वहीं आग में पड ़ नेवाले हैं , वे उसमें सदैव रहेंगे
(trg)="s2.39"> Adapun orang-orang yang kafir dan mendustakan ayat-ayat Kami , mereka itu penghuni neraka ; mereka kekal di dalamnya .
(src)="s2.40"> ऐ इसराईल का सन ् तान ! याद करो मेरे उस अनुग ् रह को जो मैंने तुमपर किया था । और मेरी प ् रतिज ् ञा को पूरा करो , मैं तुमसे की हुई प ् रतिज ् ञा को पूरा करूँगा और हाँ मुझी से डरो
(trg)="s2.40"> Hai Bani Israil , ingatlah akan nikmat-Ku yang telah Aku anugerahkan kepadamu , dan penuhilah janjimu kepada-Ku , niscaya Aku penuhi janji-Ku kepadamu ; dan hanya kepada-Ku-lah kamu harus takut ( tunduk ) .
(src)="s2.41"> और ईमान लाओ उस चीज ़ पर जो मैंने उतारी है , जो उसकी पुष ् टि में है , जो तुम ् हारे पास है , और सबसे पहले तुम ही उसके इनकार करनेवाले न बनो । और मेरी आयतों को थोड ़ ा मूल ् य प ् राप ् त करने का साधन न बनाओ , मुझसे ही तुम डरो
(trg)="s2.41"> Dan berimanlah kamu kepada apa yang telah Aku turunkan ( Al Quran ) yang membenarkan apa yang ada padamu ( Taurat ) , dan janganlah kamu menjadi orang yang pertama kafir kepadanya , dan janganlah kamu menukarkan ayat-ayat-Ku dengan harga yang rendah , dan hanya kepada Akulah kamu harus bertakwa .
(src)="s2.42"> और सत ् य में असत ् य का घाल-मेल न करो और जानते-बुझते सत ् य को छिपाओ मत
(trg)="s2.42"> Dan janganlah kamu campur adukkan yang hak dengan yang bathil dan janganlah kamu sembunyikan yang hak itu , sedang kamu mengetahui .
(src)="s2.43"> और नमाज ़ क ़ ायम करो और ज ़ कात दो और ( मेरे समक ् ष ) झुकनेवालों के साथ झुको
(trg)="s2.43"> Dan dirikanlah shalat , tunaikanlah zakat dan ruku 'lah beserta orang-orang yang ruku ' .
(src)="s2.44"> क ् या तुम लोगों को तो नेकी और एहसान का उपदेश देते हो और अपने आपको भूल जाते हो , हालाँकि तुम किताब भी पढ ़ ते हो ? फिर क ् या तुम बुद ् धि से काम नहीं लेते ?
(trg)="s2.44.0"> Mengapa kamu suruh orang lain ( mengerjakan ) kebaktian , sedang kamu melupakan diri ( kewajiban ) mu sendiri , padahal kamu membaca Al Kitab ( Taurat ) ?
(trg)="s2.44.1"> Maka tidaklah kamu berpikir ?
(src)="s2.45"> धैर ् य और नमाज ़ से मदद लो , और निस ् संदेह यह ( नमाज ) बहुत कठिन है , किन ् तु उन लोगों के लिए नहीं जिनके दिल पिघले हुए हो ;
(trg)="s2.45.0"> Jadikanlah sabar dan shalat sebagai penolongmu .
(trg)="s2.45.1"> Dan sesungguhnya yang demikian itu sungguh berat , kecuali bagi orang-orang yang khusyu ' ,
(src)="s2.46"> जो समझते है कि उन ् हें अपने रब से मिलना हैं और उसी की ओर उन ् हें पलटकर जाना है
(trg)="s2.46"> ( yaitu ) orang-orang yang meyakini , bahwa mereka akan menemui Tuhannya , dan bahwa mereka akan kembali kepada-Nya .
(src)="s2.47"> ऐ इसराईल की सन ् तान ! याद करो मेरे उस अनुग ् रह को जो मैंने तुमपर किया और इसे भी कि मैंने तुम ् हें सारे संसार पर श ् रेष ् ठता प ् रदान की थी ;
(trg)="s2.47"> Hai Bani Israil , ingatlah akan nikmat-Ku yang telah Aku anugerahkan kepadamu dan ( ingatlah pula ) bahwasanya Aku telah melebihkan kamu atas segala umat .
(src)="s2.48"> और डरो उस दिन से जब न कोई किसी भी ओर से कुछ तावान भरेगा और न किसी की ओर से कोई सिफ ़ ारिश ही क ़ बूल की जाएगी और न किसी की ओर से कोई फ ़ िद ् या ( अर ् थदंड ) लिया जाएगा और न वे सहायता ही पा सकेंगे ।
(trg)="s2.48"> Dan jagalah dirimu dari ( azab ) hari ( kiamat , yang pada hari itu ) seseorang tidak dapat membela orang lain , walau sedikitpun ; dan ( begitu pula ) tidak diterima syafa 'at dan tebusan dari padanya , dan tidaklah mereka akan ditolong .
(src)="s2.49"> और याद करो जब हमने तुम ् हें फ ़ िरऔनियों से छुटकारा दिलाया जो तुम ् हें अत ् यन ् त बुरी यातना देते थे , तुम ् हारे बेटों को मार डालते थे और तुम ् हारी स ् त ् रियों को जीवित रहने देते थे ; और इसमं तुम ् हारे रब की ओर से बड ़ ी परीक ् षा थी
(trg)="s2.49.0"> Dan ( ingatlah ) ketika Kami selamatkan kamu dari ( Fir 'aun ) dan pengikut-pengikutnya ; mereka menimpakan kepadamu siksaan yang seberat-beratnya , mereka menyembelih anak-anakmu yang laki-laki dan membiarkan hidup anak-anakmu yang perempuan .
(trg)="s2.49.1"> Dan pada yang demikian itu terdapat cobaan-cobaan yang besar dari Tuhanmu .
(src)="s2.50"> याद करो जब हमने तुम ् हें सागर में अलग-अलग चौड ़ े रास ् ते से ले जाकर छुटकारा दिया और फ ़ िरऔनियों को तुम ् हारी आँखों के सामने डूबो दिया
(trg)="s2.50"> Dan ( ingatlah ) , ketika Kami belah laut untukmu , lalu Kami selamatkan kamu dan Kami tenggelamkan ( Fir 'aun ) dan pengikut-pengikutnya sedang kamu sendiri menyaksikan .
(src)="s2.51"> और याद करो जब हमने मूसा से चालीस रातों का वादा ठहराया तो उसके पीछे तुम बछड ़ े को अपना देवता बना बैठे , तुम अत ् याचारी थे
(trg)="s2.51"> Dan ( ingatlah ) , ketika Kami berjanji kepada Musa ( memberikan Taurat , sesudah ) empat puluh malam , lalu kamu menjadikan anak lembu ( sembahan ) sepeninggalnya dan kamu adalah orang-orang yang zalim .
(src)="s2.52"> फिर इसके पश ् चात भी हमने तुम ् हें क ् षमा किया , ताकि तुम कृतज ् ञता दिखालाओ
(trg)="s2.52"> Kemudian sesudah itu Kami maafkan kesalahanmu , agar kamu bersyukur .
(src)="s2.53"> और याद करो जब मूसा को हमने किताब और कसौटी प ् रदान की , ताकि तुम मार ् ग पा सको
(trg)="s2.53"> Dan ( ingatlah ) , ketika Kami berikan kepada Musa Al Kitab ( Taurat ) dan keterangan yang membedakan antara yang benar dan yang salah , agar kamu mendapat petunjuk .
(src)="s2.54"> और जब मूसा ने अपनी क ़ ौम से कहा , " ऐ मेरी कौम के लोगो ! बछड ़ े को देवता बनाकर तुमने अपने ऊपर ज ़ ुल ् म किया है , तो तुम अपने पैदा करनेवाले की ओर पलटो , अतः अपने लोगों को स ् वयं क ़ त ् ल करो । यही तुम ् हारे पैदा करनेवाले की स ् पष ् ट में तुम ् हारे लिए अच ् छा है , फिर उसने तुम ् हारी तौबा क ़ बूल कर ली । निस ् संदेह वह बड ़ ी तौबा क ़ बूल करनेवाला , अत ् यन ् त दयावान है । "
(trg)="s2.54.0"> Dan ( ingatlah ) , ketika Musa berkata kepada kaumnya : " Hai kaumku , sesungguhnya kamu telah menganiaya dirimu sendiri karena kamu telah menjadikan anak lembu ( sembahanmu ) , maka bertaubatlah kepada Tuhan yang menjadikan kamu dan bunuhlah dirimu .
(trg)="s2.54.1"> Hal itu adalah lebih baik bagimu pada sisi Tuhan yang menjadikan kamu ; maka Allah akan menerima taubatmu .
(src)="s2.55"> और याद करो जब तुमने कहा था , " ऐ मूसा , हम तुमपर ईमान नहीं लाएँगे जब तक अल ् लाह को खुल ् लम-खुल ् ला न देख लें । " फिर एक कड ़ क ने तुम ् हें आ दबोचा , तुम देखते रहे
(trg)="s2.55"> Dan ( ingatlah ) , ketika kamu berkata : " Hai Musa , kami tidak akan beriman kepadamu sebelum kami melihat Allah dengan terang , karena itu kamu disambar halilintar , sedang kamu menyaksikannya " .
(src)="s2.56"> फिर तुम ् हारे निर ् जीव हो जाने के पश ् चात हमने तुम ् हें जिला उठाया , ताकि तुम कृतज ् ञता दिखलाओ
(trg)="s2.56"> Setelah itu Kami bangkitkan kamu sesudah kamu mati , supaya kamu bersyukur .
(src)="s2.57"> और हमने तुमपर बादलों की छाया की और तुमपर ' मन ् न ' और ' सलबा ' उतारा - " खाओ , जो अच ् छी पाक चीजें हमने तुम ् हें प ् रदान की है । " उन ् होंने हमारा तो कुछ भी नहीं बिगाड ़ ा , बल ् कि वे अपने ही ऊपर अत ् याचार करते रहे
(trg)="s2.57.0"> Dan Kami naungi kamu dengan awan , dan Kami turunkan kepadamu " manna " dan " salwa " .
(trg)="s2.57.1"> Makanlah dari makanan yang baik-baik yang telah Kami berikan kepadamu ; dan tidaklah mereka menganiaya Kami ; akan tetapi merekalah yang menganiaya diri mereka sendiri .
(src)="s2.58"> और जब हमने कहा था , " इस बस ् ती में प ् रवेश करो फिर उसमें से जहाँ से चाहो जी भर खाओ , और बस ् ती के द ् वार में सजदागुज ़ ार बनकर प ् रवेश करो और कहो , " छूट हैं । " हम तुम ् हारी खताओं को क ् षमा कर देंगे और अच ् छे से अच ् छा काम करनेवालों पर हम और अधिक अनुग ् रह करेंगे । "
(trg)="s2.58"> Dan ( ingatlah ) , ketika Kami berfirman : " Masuklah kamu ke negeri ini ( Baitul Maqdis ) , dan makanlah dari hasil buminya , yang banyak lagi enak dimana yang kamu sukai , dan masukilah pintu gerbangnya sambil bersujud , dan katakanlah : " Bebaskanlah kami dari dosa " , niscaya Kami ampuni kesalahan-kesalahanmu , dan kelak Kami akan menambah ( pemberian Kami ) kepada orang-orang yang berbuat baik " .
(src)="s2.59"> फिर जो बात उनसे कहीं गई थी ज ़ ालिमों ने उसे दूसरी बात से बदल दिया । अन ् ततः ज ़ ालिमों पर हमने , जो अवज ् ञा वे कर रहे थे उसके कारण , आकाश से यातना उतारी
(trg)="s2.59.0"> Lalu orang-orang yang zalim mengganti perintah dengan ( mengerjakan ) yang tidak diperintahkan kepada mereka .
(trg)="s2.59.1"> Sebab itu Kami timpakan atas orang-orang yang zalim itu dari langit , karena mereka berbuat fasik .
(src)="s2.60"> और याद करो जब मूसा ने अपनी क ़ ौम के लिए पानी की प ् रार ् थना को तो हमने कहा , " चट ् टान पर अपनी लाठी मारो , " तो उससे बारह स ् रोत फूट निकले और हर गिरोह ने अपना-अपना घाट जान लिया - " खाओ और पियो अल ् लाह का दिया और धरती में बिगाड ़ फैलाते न फिरो । "
(trg)="s2.60.2"> Sungguh tiap-tiap suku telah mengetahui tempat minumnya ( masing-masing ) .
(trg)="s2.60.3"> Makan dan minumlah rezeki ( yang diberikan ) Allah , dan janganlah kamu berkeliaran di muka bumi dengan berbuat kerusakan .
(src)="s2.61"> और याद करो जब तुमने कहा था , " ऐ मूसा , हम एक ही प ् रकार के खाने पर कदापि संतोष नहीं कर सकते , अतः हमारे लिए अपने रब से प ् रार ् थना करो कि हमारे वास ् ते धरती की उपज से साग-पात और ककड ़ ियाँ और लहसुन और मसूर और प ् याज ़ निकाले । " और मूसा ने कहा , " क ् या तुम जो घटिया चीज ़ है उसको उससे बदलकर लेना चाहते हो जो उत ् तम है ? किसी नगर में उतरो , फिर जो कुछ तुमने माँगा हैं , तुम ् हें मिल जाएगा " - और उनपर अपमान और हीन दशा थोप दी गई , और अल ् लाह के प ् रकोप के भागी हुए । यह इसलिए कि वे अल ् लाह की आयतों का इनकार करते रहे और नबियों की अकारण हत ् या करते थे । यह इसलिए कि उन ् होंने अवज ् ञा की और वे सीमा का उल ् लंघन करते रहे
(trg)="s2.61.0"> Dan ( ingatlah ) , ketika kamu berkata : " Hai Musa , kami tidak bisa sabar ( tahan ) dengan satu macam makanan saja .
(trg)="s2.61.1"> Sebab itu mohonkanlah untuk kami kepada Tuhanmu , agar Dia mengeluarkan bagi kami dari apa yang ditumbuhkan bumi , yaitu sayur-mayurnya , ketimunnya , bawang putihnya , kacang adasnya , dan bawang merahnya " .
(src)="s2.62"> निस ् संदेह , ईमानवाले और जो यहूदी हुए और ईसाई और साबिई , जो भी अल ् लाह और अन ् तिम दिन पर ईमान लाया और अच ् छा कर ् म किया तो ऐसे लोगों का उनके अपने रब के पास ( अच ् छा ) बदला है , उनको न तो कोई भय होगा और न वे शोकाकुल होंगे -
(trg)="s2.62"> Sesungguhnya orang-orang mukmin , orang-orang Yahudi , orang-orang Nasrani dan orang-orang Shabiin , siapa saja diantara mereka yang benar-benar beriman kepada Allah , hari kemudian dan beramal saleh , mereka akan menerima pahala dari Tuhan mereka , tidak ada kekhawatiran kepada mereka , dan tidak ( pula ) mereka bersedih hati .
(src)="s2.63"> और याद करो जब हमने इस हाल में कि तूर पर ् वत को तुम ् हारे ऊपर ऊँचा कर रखा था , तुमसे दृढ ़ वचन लिया था , " जो चीज ़ हमने तुम ् हें दी हैं उसे मजबूती के साथ पकड ़ ो और जो कुछ उसमें हैं उसे याद रखो ताकि तुम बच सको । "
(trg)="s2.63"> Dan ( ingatlah ) , ketika Kami mengambil janji dari kamu dan Kami angkatkan gunung ( Thursina ) di atasmu ( seraya Kami berfirman ) : " Peganglah teguh-teguh apa yang Kami berikan kepadamu dan ingatlah selalu apa yang ada didalamnya , agar kamu bertakwa " .
(src)="s2.64"> फिर इसके पश ् चात भी तुम फिर गए , तो यदि अल ् लाह की कृपा और उसकी दयालुता तुम पर न होती , तो तुम घाटे में पड ़ गए होते
(trg)="s2.64"> Kemudian kamu berpaling setelah ( adanya perjanjian ) itu , maka kalau tidak ada karunia Allah dan rahmat-Nya atasmu , niscaya kamu tergolong orang yang rugi .
(src)="s2.65"> और तुम उन लोगों के विषय में तो जानते ही हो जिन ् होंने तुममें से ' सब ् त ' के दिन के मामले में मर ् यादा का उल ् लंघन किया था , तो हमने उनसे कह दिया , " बन ् दर हो जाओ , धिक ् कारे और फिटकारे हुए ! "
(trg)="s2.65"> Dan sesungguhnya telah kamu ketahui orang-orang yang melanggar diantaramu pada hari Sabtu , lalu Kami berfirman kepada mereka : " Jadilah kamu kera yang hina " .
(src)="s2.66"> फिर हमने इसे सामनेवालों और बाद के लोगों के लिए शिक ् षा-सामग ् री और डर रखनेवालों के लिए नसीहत बनाकर छोड ़ ा
(trg)="s2.66"> Maka Kami jadikan yang demikian itu peringatan bagi orang-orang dimasa itu , dan bagi mereka yang datang kemudian , serta menjadi pelajaran bagi orang-orang yang bertakwa .
(src)="s2.67"> और याद करो जब मूसा ने अपनी क ़ ौम से कहा , " निश ् चय ही अल ् लाह तुम ् हें आदेश देता है कि एक गाय जब ् ह करो । " कहने लगे , " क ् या तुम हमसे परिहास करते हो ? " उसने कहा , " मैं इससे अल ् लाह की पनाह माँगता हूँ कि जाहिल बनूँ । "
(trg)="s2.67.0"> Dan ( ingatlah ) , ketika Musa berkata kepada kaumnya : " Sesungguhnya Allah menyuruh kamu menyembelih seekor sapi betina " .
(trg)="s2.67.1"> Mereka berkata : " Apakah kamu hendak menjadikan kami buah ejekan ? "
(src)="s2.68"> बोले , " हमारे लिए अपने रब से निवेदन करो कि वह हम पर स ् पष ् टा कर दे कि वह गाय कौन-सी है ? " उसने कहा , " वह कहता है कि वह ऐसी गाय है जो न बूढ ़ ी है , न बछिया , इनके बीच की रास है ; तो जो तुम ् हें हुक ् म दिया जा रहा है , करो । "
(trg)="s2.68.0"> Mereka menjawab : " Mohonkanlah kepada Tuhanmu untuk kami , agar Dia menerangkan kepada kami ; sapi betina apakah itu " .
(trg)="s2.68.1"> Musa menjawab : " Sesungguhnya Allah berfirman bahwa sapi betina itu adalah sapi betina yang tidak tua dan tidak muda ; pertengahan antara itu ; maka kerjakanlah apa yang diperintahkan kepadamu " .
(src)="s2.69"> कहने लगे , " हमारे लिए अपने रब से निवेदन करो कि वह हमें बता दे कि उसका रंग कैसा है ? " कहा , " वह कहता है कि वह गाय सुनहरी है , गहरे चटकीले रंग की कि देखनेवालों को प ् रसन ् न कर देती है । "
(trg)="s2.69.0"> Mereka berkata : " Mohonkanlah kepada Tuhanmu untuk kami agar Dia menerangkan kepada kami apa warnanya " .
(trg)="s2.69.1"> Musa menjawab : " Sesungguhnya Allah berfirman bahwa sapi betina itu adalah sapi betina yang kuning , yang kuning tua warnanya , lagi menyenangkan orang-orang yang memandangnya " .
(src)="s2.70"> बोले , " हमारे लिए अपने रब से निवेदन करो कि वह हमें बता दे कि वह कौन-सी है , गायों का निर ् धारण हमारे लिए संदिग ् ध हो रहा है । यदि अल ् लाह ने चाहा तो हम अवश ् य । पता लगा लेंगे । "
(trg)="s2.70"> Mereka berkata : " Mohonkanlah kepada Tuhanmu untuk kami agar Dia menerangkan kepada kami bagaimana hakikat sapi betina itu , karena sesungguhnya sapi itu ( masih ) samar bagi kami dan sesungguhnya kami insya Allah akan mendapat petunjuk ( untuk memperoleh sapi itu ) " .
(src)="s2.71"> उसने कहा , " वह कहता हैं कि वह ऐसा गाय है जो सधाई हुई नहीं है कि भूमि जोतती हो , और न वह खेत को पानी देती है , ठीक-ठाक है , उसमें किसी दूसरे रंग की मिलावट नहीं है । " बोले , " अब तुमने ठीक बात बताई है । " फिर उन ् होंने उसे ज ़ ब ् ह किया , जबकि वे करना नहीं चाहते थे
(trg)="s2.71.0"> Musa berkata : " Sesungguhnya Allah berfirman bahwa sapi betina itu adalah sapi betina yang belum pernah dipakai untuk membajak tanah dan tidak pula untuk mengairi tanaman , tidak bercacat , tidak ada belangnya " .
(trg)="s2.71.1"> Mereka berkata : " Sekarang barulah kamu menerangkan hakikat sapi betina yang sebenarnya " .
(src)="s2.72"> और याद करो जब तुमने एक व ् यक ् ति की हत ् या कर दी , फिर उस सिलसिले में तुमने टाल-मटोल से काम लिया - जबकि जिसको तुम छिपा रहे थे , अल ् लाह उसे खोल देनेवाला था
(trg)="s2.72.0"> Dan ( ingatlah ) , ketika kamu membunuh seorang manusia lalu kamu saling tuduh menuduh tentang itu .
(trg)="s2.72.1"> Dan Allah hendak menyingkapkan apa yang selama ini kamu sembunyikan .
(src)="s2.73"> तो हमने कहा , " उसे उसके एक हिस ् से से मारो । " इस प ् रकार अल ् लाह मुर ् दों को जीवित करता है और तुम ् हें अपनी निशानियाँ दिखाता है , ताकि तुम समझो
(trg)="s2.73.0"> Lalu Kami berfirman : " Pukullah mayat itu dengan sebahagian anggota sapi betina itu ! "
(trg)="s2.73.1"> Demikianlah Allah menghidupkan kembali orang-orang yang telah mati , dam memperlihatkan padamu tanda-tanda kekuasaan-Nya agar kamu mengerti .
(src)="s2.74"> फिर इसके पश ् चात भी तुम ् हारे दिल कठोर हो गए , तो वे पत ् थरों की तरह हो गए बल ् कि उनसे भी अधिक कठोर ; क ् योंकि कुछ पत ् थर ऐसे भी होते है जिनसे नहरें फूट निकलती है , और कुछ ऐसे भी होते है कि फट जाते है तो उनमें से पानी निकलने लगता है , और उनमें से कुछ ऐसे भी होते है जो अल ् लाह के भय से गिर जाते है । और अल ् लाह , जो कुछ तुम कर रहे हो , उससे बेखबर नहीं है
(trg)="s2.74.0"> Kemudian setelah itu hatimu menjadi keras seperti batu , bahkan lebih keras lagi .
(trg)="s2.74.1"> Padahal diantara batu-batu itu sungguh ada yang mengalir sungai-sungai dari padanya dan diantaranya sungguh ada yang terbelah lalu keluarlah mata air dari padanya dan diantaranya sungguh ada yang meluncur jatuh , karena takut kepada Allah .
(src)="s2.75"> तो क ् या तुम इस लालच में हो कि वे तुम ् हारी बात मान लेंगे , जबकि उनमें से कुछ लोग अल ् लाह का कलाम सुनते रहे हैं , फिर उसे भली-भाँति समझ लेने के पश ् चात जान-बूझकर उसमें परिवर ् तन करते रहे ?
(trg)="s2.75"> Apakah kamu masih mengharapkan mereka akan percaya kepadamu , padahal segolongan dari mereka mendengar firman Allah , lalu mereka mengubahnya setelah mereka memahaminya , sedang mereka mengetahui ? .